Friday, 23 March 2012

प्रेरणा...

*एक दिन आउंगी..
तुमसे मिलने..
और पूछूंगी ..
शोहरत की अलमारियों..
में सजी..
घमंड से तनी..
तुम्हारी इन किताबों से..
की,इनमें जो..
लिखा है..
मैं ही तो हूँ ना..
"प्रेरणा" ......................(श.पाण्डेय)*

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