kasturiabhas
युगों युगों से भटक रही हूँ अंतहीन अनायास... स्वयं को खोकर स्वयं में पाया 'कस्तूरीआभास'.
Thursday, 6 March 2014
'अवध में बिन तेरे इक शाम गुज़ारी ऐसे
रात ,दुल्हन बिना पिया के उतारी जैसे ……… (श.पाण्डेय )
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